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विदेेश दौरे पर निकले करमापा को नही मिल रहा भारत वापिस लौटने का वीजा, बढ़ी समस्याएं

तिब्बती बौद्ध धर्म के कग्यु बौद्ध पंथ के मुखिया 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे के भारत लौटने पर अभी तक संशय बना हुआ है।

तिब्बती बौद्ध धर्म के कग्यु बौद्ध पंथ के मुखिया 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे के भारत लौटने पर अभी तक संशय बना हुआ है। बता दें कि करमापा पिछले एक वर्ष से अमेरिका यात्रा पर हैं। उनके भारत लौटने को लेकर आशंका जताई जा रही थी। 17वें करमापा का प्रभाव न केवल भारत के सिक्किम व अरुणाचल प्रदेशों में है, बल्कि यूरोप के कई देशों सहित अमेरिका व चीन के एक बड़े हिस्से में भी है।

जानकारी के अनुसार बता दें कि, करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे 29 नवंबर को धर्मशाला में आयोजित होने वाले प्रमुख तिब्बती बौद्ध परंपराओं के प्रमुखों की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने धर्मशाला आना चाहते हैं, लेकिन भारत सरकार ने तिब्बती धार्मिक नेताओं के सम्मेलन में भाग लेने के लिए करमापा को अभी तक वीजा जारी नहीं किया है। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा करेंगे।

बता दें कि मार्च 2018 में करमापा ने डोमिनिका के राष्ट्रमंडल की नागरिकता हासिल की और उस देश का पासपोर्ट प्राप्त किया। डोमिनिका कैरेबियन सागर में वेस्टइंडीज में एक द्वीप देश है। पासपोर्ट प्राप्त करने के बाद करमापा ने न्यूयॉर्क शहर में भारतीय दूतावास में अपने पिछले यात्रा दस्तावेज को समर्पण करने की कोशिश की। भारत सरकार भारत में तिब्बतियों के लिए पासपोर्ट के स्थान पर एक पहचान पत्र (आईसी जिसे येलो बुक के नाम से जाना जाता है) यात्रा दस्तावेज जारी करता है।

उन्हें बताया गया था कि चूंकि दूतावास के पास दिल्ली से निर्देश नहीं थे, इसलिए उन्होंने करमापा की आईसी के समर्पण को स्वीकार नहीं किया। पहचान प्रमाण पत्र से संबंधित नियमों के अनुसार दस्तावेज धारण करने वाले व्यक्ति को किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करने के बाद भारत के निकटतम पासपोर्ट जारी करने वाले प्राधिकारी को समर्पण करना पड़ता है। किसी अन्य देश की नागरिकता हासिल होने के बाद आईसी वैध नहीं रह जाती।

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