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सबरीमाला में दो महिलाओं ने किया प्रवेश, टूट गई सदियों पुरानी परंपरा

सबरीमाला मंदिर की कई सालों से चली आ रही पुरानी परंपरा टूट चूकी है।

केरलः सबरीमाला मंदिर की कई सालों से चली आ रही पुरानी परंपरा टूट चूकी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब जाकर 50 वर्ष से कम उम्र की दो महिलाओं ने भगवान के दर्शन किये हैं। मंदिर के अंदर प्रवेश करके इन दो महिलाओं ने इतिहास रच दिया है। बताया जा रहा है कि दोनों महिलाएं आधी रात को मंदिर की सीढ़ियों पर चढञी और सारी रात चढ़ाई करने के बाद सुबह 3.45 पर भगवान के दर्शन किये। ये भी बताया जा रहा है कि दोनों महिलाओं  के साथ पुलिसकर्मी भी थे। जिनके सहारे से महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश किया और भगवान के दर्शन किये।

Two women devotees Bindu & Kanakdurga in their 40s entered & offered prayers at Kerala’s #SabarimalaTemple at 3.45am today. They were accompanied by police personnel. They had tried to visit Sabarimala Temple in December’18 but failed amidst massive protests. https://t.co/aAsXZd6NSX

— ANI (@ANI) January 2, 2019

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बहुत सी महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी, लेकिन विरोध के कारण मंदिर में कोई महिला प्रवेश नहीं कर पा रही थी। सितंबर में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, लेकिन इसी के सात ही लोगों का विरोध शुरु ह गया और लोगों ने कहा कि इस आदेश के सात उनकी आस्था जुड़ी है कि 50 वर्ष से कम उम्र की महिला मंदिर में प्रवेश नहीं करती।

23 दिसंबर को 11 महिलाओं के एक समूह ने भी मंदिर जाने की कोशिश की थी, लेकिन उनका विरोध हुआ।महिलाओं के इस समूह का नेतृत्व सेल्वी कर रही थीं, जिनका संबंध तमिलनाडु के मनिति महिला समूह से है। भक्तों द्वारा पहाड़ी पर चढ़ने से उन्हें रोकने और भगाने पर इन महिलाओं को पंबा से मदुरै के लिए वापस जाने को बाध्य होना पड़ा।

क्या है सबरीमाला मामला

बता दें कि केरल स्थित सबरीमाला मंदिर में 10 साल लेकर 50 साल वर्ष तक की उम्र की महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित था। परंपरा के मुताबिक माना जाता था कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे और जो महिलाएं रजस्वला होती हैं उन्हें मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होनी चाहिए। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, सुप्रीम कोर्ट ने 5 जजों की पीठ बनाई थी। इसने 4-1 से फैसला दिया था कि सबरीमाला मंदिर में किसी भी आयु वर्ग की महिला को प्रवेश से रोका नहीं जा सकता। इस पांच सदस्यीय पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति नरीमन, न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर शामिल थे।

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