भोपाल

सरकार कर्जमाफी का ढिंढोरा पीटने में व्यस्त, यहां ठंड में ठिठुर रहे किसान

राज्य शासन ने उपार्जन की तिथि बढ़ाने का ऐलान कर दिया है, लेकिन उपार्जन केंद्रों पर चल रही अव्यवस्था को लेकर सरकार का कोई ध्यान नहीं है।

भोपाल: राज्य शासन ने उपार्जन की तिथि बढ़ाने का ऐलान कर दिया है, लेकिन उपार्जन केंद्रों पर चल रही अव्यवस्था को लेकर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। केंद्रो पर खरीदी का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। जिसकी वजह से केंद्रो के बाहर किसानों की लाइन लगी है। किसानों की वजह से ही सत्ता परिवर्तन के हालात बने। बदले हालात में सबसे ज्यादा तकलीफ किसानों को ही झेलनी पड़ रही है। सत्ता में आते ही सरकार कर्जमाफी में जुट गई, अभी तक किसी किसान के खाते में चवन्नी नहीं पहुंची, लेकिन किसान अपने उपज बेचने के लिए एक-एक हफ्ते से खरीद केंद्रों के बाहर ढेरा डाले हुए हैं। सर्दी की रातों खुले आसमान के नीचे काटने को मजबूर है। खास बात यह है कि कर्जमाफी से उत्साहित सरकार का किसानों की इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं है। प्रदेश में ज्यादातर जिलों में किसान खरीद केंद्रों के बाहर अपनी उपज के साथ डेरा डाले हुए हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी उपज को नहीं तोला जा रहा है। सांठगांठ के जरिए व्यापारियों की फसल तोली जा रही है।

10 दिन से ठिठुर रहे किसान
खरीदी का काम खाद्य विभाग द्वारा किया जा रहा है। खरीदी के नाम चल रही मिलीभगत से शिवपुरी जिले के किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर तोमर के प्रभार वाला जिला शिवपुरी है। यहां सहकारी सोसायटियों के बाहर किसान 10-10 दिन से डेरा डाले हुए हैं। किसानों का आरोप है कि जिले की लालगढ़ सोसायटियों पर व्यापारियों का माल तोला जा रहा है। जबकि किसानों के लिए लगााए गए कांटों पर लेबर ही नहीं लगाई गई है। इस संबंध में शिवपुरी कलेक्टर अनुग्रह पी से भी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन व्यवस्था बहाल करने में कलेक्टर भी नाकाम रही हैं।

खरीद केंद्र पर पकड़ा फर्जीवाड़ा
भावांतर समर्थन मूल्य खरीदी केंद्र बैराड़ में प्रशासन की छापेमारी के दौरान फर्जी तरीके से उड़द बेचे जाने का मामला सामने आया है। गुरुवार दोपहर पोहरी एसडीएम मुकेश सिंह, नायब तहसीलदार और टीम के साथ पहुंचे। यहां फसल बेचने आए किसानों के दस्तावेजों की पड़ताल की तो फर्जीवाड़ा सामने आया। एक किसान के पंजीयन में दर्ज दस्तावेजों की जब पड़ताल की गई तो खसरे में किसान के नाम जमीन ही नहीं निकली। जबकि उक्त किसान ने पांच अलग-अलग स्थानों पर भूमि दशार्ते हुए पंजीयन कराया और यहां उड़द बेचने आया था। खरीद केंद्रों पर मिलीभगत से वह अलग-अलग केंद्रों पर फसल बेच रहा था। व्यापारियों की मिलीभगत से उपार्जन केेंद्रों पर खरीदी हो रही है। सरकार को किसानों की समस्या से कोई मतलब नहीं है। अभी तक सरकार का कोई प्रतिनिधि किसानों के बीच नहीं पहुंचा।

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