उत्तरप्रदेश

राम मंदिर को लेकर बोले RSS नेता- नहीं बदलेगी मंदिर की जगह, जजों की बपौती नहीं है संविधान

लोकसभा चुनावों के नजदीक आते ही राम मंदिर पर सियासत तेज हो गई है।

लोकसभा चुनावों के नजदीक आते ही राम मंदिर पर सियासत तेज हो गई है। RSS नेता Indresh Kumar ने राम मंदिर को लेकर एक बयान दिया है, जिस पर विवाद छिड़ सकता है।

RSS नेता Indresh Kumar ने राम मंदिर के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत का संविधान जजों की बपौती नहीं है, क्या वो कानून से भी ऊपर हैं। दरअसल Indresh Kumar चंड़ीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में राम जन्मभूमि से अन्याय कार्यक्रम में बोल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर की सुनवाई टालने से संघ नाराज चल रहा है। अभी हाल ही में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देर से मिला न्याय अन्याय के बराबर होता है।

संघ नेता Indresh Kumar ने कहा कि राम जन्म स्थान बदलने की इजाजत क्यों दी गई। जब वेटिकन बाबा, काबा, और स्वर्ण मंदिर नहीं बदले जा सकते तो राम जन्मभूमि कैसे बदली जा सकती है। Indresh Kumar ने कहा कि मस्जिद बनाने की अपनी शर्ते हैं। बाबर को किसी ने जमीन दान में नहीं दी। न बाबर ने जमीन किसी से खरीदी। वहां बाबर ने राम मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई थी। जो इस्लाम के मुताबिक गुनाह है।

RSS नेता ने कहा कि बाबर ने इस्लाम और कुरान शरीफ का अपमान किया क्या मुसलमान उस बाबर की इबादत करना चाहेंगे। इस्लाम के मुताबिक मस्जिद किसी इंसान या शहंशाह के नाम पर नहीं हो सकती लेकिन बाबर ने मुसमानों से अल्लाह का नाम छीन लिया और अपना नाम मस्जिद को दे दिया। कुमार ने कहा कि हमारा बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारियों के साथ क्या रिश्ता है।

RSS नेता ने कहा कि शाहजहां ताजमहल के साथ कोर्ट या इंडस्ट्री भी बनवा सकता था। बाबर भी हम पर राज करने आया था। आज कुछ लोग बाते कर रहे हैं कि फैजाबाद को अयोध्या करने से रोजगार मिला क्या। मैं उनसे पूछता हूं क्या अयोध्या को फैजाबाद करने से रोजगार मिला था। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर की सुनवाई जनवरी 2019 तक टाल दी है।

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