उत्तरप्रदेश

धर्म संसद में संतों का ऐलान, 21 फरवरी से बनेगा राम मंदिर

 कुंभ मेले में 28, 29 और 30 जनवरी को चली धर्म संसद के मंगलवार को अंतिम दिन ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा पारित परम धर्मादेश में हिन्दू समाज से बसंत पंचमी के बाद प्रयागराज से अयोध्या के लिए प्रस्थान करने का आह्वान किया

प्रयागराज: कुंभ मेले में 28, 29 और 30 जनवरी को चली धर्म संसद के मंगलवार को अंतिम दिन ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा पारित परम धर्मादेश में हिन्दू समाज से बसंत पंचमी के बाद प्रयागराज से अयोध्या के लिए प्रस्थान करने का आह्वान किया गया है। धर्म संसद के समापन के बाद जारी धर्मादेश में कहा गया है, सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण में हिंदुओं की मनोकामना की पूर्ति के लिए यजुर्वेद, कृष्ण यजुर्वेद तथा शतपथ ब्राह्ण में बताए गए इष्टिका न्यास विधि सम्मत कराने के लिए 21 फरवरी, 2019 का शुभ मुहूर्त निकाला गया है। धर्मादेश के मुताबिक, इसके लिए यदि हमें गोली भी खानी पड़ी या जेल भी जाना पड़े तो उसके लिए हम तैयार हैं।
यदि हमारे इस कार्य में सत्ता के 3 अंगों में से किसी द्वारा अवरोध डाला गया तो ऐसी स्थिति में संपूर्ण हिन्दू जनता को यह धर्मादेश जारी करते हैं कि जब तक श्रीराम जन्मभूमि विवाद का फैसला नहीं हो जाता अथवा हमें राम जन्मभूमि प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक हर हिन्दू का यह कर्त्तव्य होगा कि 4 इष्टिकाओं को अयोध्या ले जाकर वेदोक्त इष्टिका न्यास पूजन करें।

धर्मादेश में कहा गया है, न्यायपालिका की शीघ्र फैसले की अपेक्षा धूमिल होते देख हमने विधायिका से अपेक्षा की और 27 नवंबर, 2018 को परम धर्मादेश जारी करते हुए भारत सरकार एवं भारत की संसद से अनुरोध किया था कि वे संविधान के अनुच्छेद 133 एवं 137 में अनुच्छेद 226 (3) के अनुसार एक नई कंडिका को संविधान संशोधन के माध्यम से प्रविष्ट कर सुप्रीम कोर्ट को 4 हफ्तों में राम जन्मभूमि विवाद के निस्तारण के लिए बाध्य करे।

उन्होंने कहा कि लेकिन बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि संसद में पूर्ण बहुमत वाली सरकार ने राम जन्मभूमि के संबंध में कुछ भी करने से इंकार कर दिया। वहीं दूसरी ओर, इस सरकार ने 2 दिन में ही संसद के दोनों सदनों में आरक्षण संबंधित विधेयक पारित करवाकर अपने प्रचंड बहुमत का प्रदर्शन किया था।

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