नई दिल्ली

2018 में बड़ा राहुल गांधी का राजनीतिक कद, लोकसभा चुनाव में देंगे कड़ी चुनौती

 राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के बाद पार्टी को मिली सफलता से न केवल वह पार्टी में एकछत्र नेता बनकर उभरे बल्कि उनका राजनीतिक कद बढ़ा है

नई दिल्लीः राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने के बाद पार्टी को मिली सफलता से न केवल वह पार्टी में एकछत्र नेता बनकर उभरे बल्कि उनका राजनीतिक कद बढ़ा है तथा यह माना जाने लगा है कि वह अगले कुछ महीनों में होने वाले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिये बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

एक वर्ष पहले गांधी के अध्यक्ष संभालने के बाद पार्टी ने 2018 में चुनावी रण में अच्छा प्रदर्शन किया जिसके चलते वह भारतीय जनता पार्टी को चार राज्यों में सत्ता से बाहर करने में सफल हुयी जबकि इससे पहले उसे लगातार उसे एक के एक बाद शिकस्त का सामना करना पड़ रहा था। कर्नाटक में जिस तरह पार्टी के रणनीतिकारों ने तेजी और चतुराई से काम किया उसके आगे भाजपा की एक नहीं चल पायी और विधानसभा में बड़ी पार्टी के रुप में उभरने के बावजूद सत्ता से बाहर होना पड़ा।

पिछले नवंबर-दिसंबर में हुये विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ सीधी लड़ाई वाले तीन राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार बनायी उससे न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा बल्कि गांधी का राजनीतिक कद भी बढ़ा। द्रविड मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) जैसे सहयोगी दल ने उन्हें विपक्षी दलों की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने का सुझाव दिया वहीं कांग्रेस की कट्टर विरोधी रही शिवसेना ने भी गांधी के नेतृत्व की सराहना की।

बीते वर्ष गांधी ने विभिन्न राजनीतिक मंचों में जिस आत्मविश्वास से प्रभावी उपस्थिति दर्ज की उससे उनकी छवि में जबरदस्त सुधार हुआ और जनमानस को उनके व्यक्तित्व में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला। कांग्रेस के दिल्ली में हुए 84वें महाअधिवेशन में पार्टी अध्यक्ष के रुप में गांधी के नाम पर मोहर लगी थी और इसमें उन्होंने जिस विजन के साथ अपनी बात रखी उससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उन पर भरोसा बढा और उन्हें लगा कि पार्टी की कमान सही हाथों में है।

कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद श्रीमती सोनिया गांधी ने भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संदेश दिया था कि राहुल गांधी कांग्रेस के एकमात्र नेता हैं। गांधी ने फरवरी में कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में पार्टी के नेताओं स्पष्ट शब्दों में  संदेश देते हुए कहा ‘‘राहुल अब सबके बॉस हैं। वह मेरे भी बॉस हैं।’’

गांधी के नेतृत्व में पार्टी ने पहले गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन किया और फिर कर्नाटक में गठबंधन सरकार बनाकर समर्थकों का जो विश्वास अर्जित किया साल के अंत तक तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनाकर इस विश्वास को और मजबूती प्रदान की। इससे कांग्रेस कार्यकर्ता गांधी के मुरीद हो गये और विपक्षी दलों की गठबंधन की राजनीति में भी उनका वजन बढा है। बाद में द्रमुक के प्रमुख स्टालिन ने खुले मंच से कहा कि श्री गांधी विपक्षी दलों की तरफ से प्रधानमंत्री पद का चेहरा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!
Close

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker