भारत

बजट में किसानों ही नहीं बल्कि गावों के लिए भी तोहफा, 5 साल में बदलेगी तस्वीर

मोदी सरकार ने कल अपना अंतरिम बजट पेश कर दिया है। इस अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है।

मोदी सरकार ने कल अपना अंतरिम बजट पेश कर दिया है। इस अंतरिम बजट में मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। इस राहत में किसानों कोे सालाना 6 हजार रुपए तक मिलेंगे। इसके अलावा अंतरिम बजट में किसानों ही नहीं बल्कि गांवों के लिए भी बड़ी सौगात दी गई है। 5 सालों के लक्ष्य में गावों को डिजिटल करने का लक्ष्य रखा गया है।

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश करते हुए कहा कि आगामी 5 सालों के दौरान एक लाख गांवों को डिजीटल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जन सुविधा केंद्रों (सी.एस.सी.) केविस्तार के जरिए इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा, जन सुविधा केंद्र गांव में कनैक्टिविटी के साथ-साथ अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं और डिजीटल ढांचा भी तैयार कर रहे हैं, जिससे हमारे गांव डिजीटल गांवों में बदल रहे हैं। तीन लाख से ज्यादा जन सुविधा केंद्र लगभग 12 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करने के साथ-साथ नागरिकों को अनेक डिजीटल सेवाएं भी प्रदान कर रहे हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, अब दुनिया में भारत में सबसे सस्ते मोबाइल टैरिफ उपलब्ध हैं, भारत अब दुनिया में मोबाइल डाटा के उपयोग के मामले में विश्व में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि पिछले 5 सालों के दौरान मोबाइल सडाटा के मासिक उपयोग में 50 फीसदी की बढ़ौतरी हुई है। भारत में अब डाटा और वॉयस कॉल्स की कीमत संभावत: विश्व में सबसे कम है।

मोबाइल निर्माता कंपनियों की संख्या 268 हुई

पीयूष गोयल ने कहा, मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत भारत मोबाइल पुर्जों की निर्माता कंपनियों के साथ नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आज मेक इन इंडिया के तहत मोबाइल और मोबाइल पुर्जों की निर्माता कंपनियों की संख्या 2 से बढ़कर 268 से ज्यादा हो गई है जो रोजगार के अपार अवसर प्रदान कर रही है। 34 करोड़ जन धन बैंक खाते खोले गए पीयूष ने बताया कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण के बाद जे.ए.एम.-डी.बी.टी. ने दूरगामी परिवर्तन किए हैं। वित्त मंत्री ने जन-धन-आधार- मोबाइल (जे.ए.एम.) और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के दूरगामी परिवर्तनों को बताया। उन्होंने कहा कि बैंकों के राष्ट्रीकरण को 50 साल हो चुके हैं लेकिन देश का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक मुख्यधारा से अछूता है, उनकी औपचारिक बैंकिंग तक पहुंच नहीं है। पिछले 5 सालों के दौरान लगभग 34 करोड़ जन धन बैंक खाते खोले गए हैं। आधार ने लाभार्थियों तक सबसिडी की पहुंच को सुनिश्चित किया है।

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