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कांग्रेस की ऑडियो टेप पर मनोहर पर्रिकर का बयान- तथ्यों को तोड़- मरोड़ कर किया पेश

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने बुधवार को कांग्रेस द्वारा उद्धृत ऑडियो क्लिप को, तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का प्रयास बताया।

पणजीः गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने बुधवार को कांग्रेस द्वारा उद्धृत ऑडियो क्लिप को, तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा विपक्षी दल के ‘‘झूठ’’ का पर्दाफाश किए जाने के बाद वे तथ्यों को तोड़ने- मरोड़ने के लिए व्याकुल हैं। आपको बता दें कि कांग्रेस ने पर्रिकर का हवाला देते हुए कहा था कि राफेल सौदे पर ‘‘फाइल उनके शयन कक्ष में’’ पड़ी हुई है।  इसके कुछ ही घंटे बाद पर्रिकर ने बयान दिए।

इससे पहले कांग्रेस ने गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे और एक अन्य व्यक्ति के बीच हुई कथित बातचीत को लेकर एक ऑडियो क्लिप जारी किया। ऑडियो में मंत्री ने कहा कि पिछले हफ्ते गोवा कैबिनेट की बैठक के दौरान पर्रिकर ने बताया था कि उनके शयन कक्ष में राफेल सौदे से जुड़ी हुई ‘‘पूरी फाइल और सभी दस्तावेज मौजूद’’ हैं। दिल्ली में संसद के बाहर आज सुबह कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मीडिया के सामने इस ऑडियो क्लिप को जारी किया।

सुरजेवाला ने यह भी पूछा कि क्या इस कारण राफेल सौदे में संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने के आदेश नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने राणे के हवाले से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने काफी रोचक बयान दिया कि राफेल के बारे में पूरी सूचना मेरे शयनकक्ष में है…इसका मतलब है कि वह ब्लैकमेल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरे शयनकक्ष में राफेल से जुड़ा हर दस्तावेज मौजूद है। पर्रिकर ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया, ‘‘कांग्रेस की तरफ से जारी ऑडियो क्लिप हाल में उच्चतम न्यायालय द्वारा राफेल सौदे में भंडाफोड़ किए गए झूठ के बाद तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का प्रयास है। कैबिनेट या किसी भी बैठक में कभी भी इस तरह की चर्चा नहीं हुई।’’  भारत और प्रांस के बीच राफेल सौदे पर हस्ताक्षर किए जाने के दौरान पर्रिकर भारत के रक्षा मंत्री थे।

राणे अपने खिलाफ लगे आरोपों से पहले ही इंकार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने कभी बातचीत नहीं की। उन्होंने कांग्रेस पर ‘‘फर्जी क्लिप’’ प्रसारित करने के आरोप भी लगाए।गौरतलब है कि पिछले वर्ष 14 दिसम्बर को उच्चतम न्यायालय ने प्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने की प्रव्रिया में अनियमितता के आरोपों वाली सभी जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया था।

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