जम्मू कश्मीर

बीते साल रक्तरंजित रहा कश्मीर, रिकॉर्ड तोड़ आतंकवादी हुए ढेर

लगभग तीन दशकों से आतंकवाद से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर में बीते वर्ष सेना आतंकवादियों पर भारी पड़ी

नई दिल्लीः लगभग तीन दशकों से आतंकवाद से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर में बीते वर्ष सेना आतंकवादियों पर भारी पड़ी और उसने जहां 250 से अधिक आतंकवादियों को ढेर किया, वहीं आतंकियों से लोहा लेते हुए 90 से अधिक सुरक्षाकर्मी शहीद हुए तथा 37 नागरिक मारे गये। नियंत्रण रेखा तथा अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में भी 2018 के दौरान अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई और गत जुलाई में ही यह आंकड़ा 1400 को पार कर गया।

सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद को लंबे समय से झेल रहे जम्मू-कश्मीर में सेना ने इस बार पुलिस और केंद्रीय बलों के साथ मिलकर आतंकवादियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए ‘ऑपरेशन ऑल आउट’ शुरु किया। पत्थरबाजों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपना गया। खुफिया एजेन्सियों और जांच एजेन्सियों ने आतंकवादियों के फंडिंग नेटवर्क की कमर तोड़ने के लिए ‘ एंटी टैरर फंडिंग’ अभियान चलाकर उन्हें मिलने वाले हवाला के धन पर अंकुश लगा दिया। इससे बौखलाए आतंकवादियों ने पूरी ताकत से बार-बार घाटी में तबाही फैलाने की कोशिश की।

सुरक्षा बलों के साल भर चले अभियानों में रिकार्डतोड़ 257 आतंकवादी मारे गये, जिनमें कुख्यात आतंकवादी संगठनों लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद के कई खूंखार आतंकवादी ढेर हुए। पिछले दस वर्षों में यह एक रिकार्ड है। आतंकवादियों के विरुद्ध विभिन्न अभियानों में 91 सुरक्षा कर्मी शहीद हुए जिनमें से 40 से अधिक पुलिसकर्मी थे। संघर्ष विराम उल्लंघन तथा विभिन्न अभियानों और झड़पों में 37 नागरिक भी मारे गये। राष्ट्रीय जांच एजेन्सी (एनआईए) ने टेरर फंडिंग के खिलाफ राजधानी दिल्ली और कश्मीर सहित 20 से भी अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर छह लोगों को गिरफ्तार किया जिनमें आतंकवादी सरगना सैयह अली शाह गिलानी का दामाद भी शामिल था।

हर साल की तरह पाकिस्तानी सेना ने इस बार भी सीमाओं पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया और अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं की संख्या गत जुलाई में ही 1432 पहुंच गयी जो पिछले कई वर्षों की तुलना में कहीं अधिक है। इन घटनाओं में कई नागरिक भी मारे गये और बड़ी संख्या में लोगों को घर छोडकर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। सेना ने भी संघर्ष विराम उल्लंघन का करारा जवाब दिया और पाकिस्तानी सेना को काफी नुकसान पहुंचाया।

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