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5 लाख तक की इनकम हुई टैक्स फ्री, मोदी सरकार का तीसरा मास्टर स्ट्रोक

गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, अयोध्या में राम मदिर के निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट से 67 एकड़ अविवादित ज़मीन लौटाने की अर्ज़ी के बाद मोदी सरकार ने मिडिल क्लास को खुश करने के लिए अंतरिम बजट में बड़ी  घोषणा की । 

गरीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, अयोध्या में राम मदिर के निर्माण के लिए सुप्रीम कोर्ट से 67 एकड़ अविवादित ज़मीन लौटाने की अर्ज़ी के बाद मोदी सरकार ने मिडिल क्लास को खुश करने के लिए अंतरिम बजट में बड़ी  घोषणा की ।

मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक:  नंबर 1
लोकसभा चुनाव से पहले संसद में वर्ष 2019-20 का अंतरिम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री पियूष गोयल ने एक फरवरी को मोदी सरकार का अंतरिम बजट में घोषणा की कि 5 लाख तक की सालाना आमदनी वालों को अब कोई टैक्स नहीं देना होगा। इस समय सालाना 2.50 लाख तक कमाने वालों को टैक्स से छूट मिली हुई थी। जिन लोगों की कुल आमदनी 6.50 लाख रुपये तक है, उन्‍हें भी किसी प्रकार के आयकर के भुगतान की जरूरत नहीं पड़ेगी, यदि वे भविष्‍य निधि, विशेष बचतों, बीमा आदि में निवेश कर लेते हैं। मोदी सरकार की यह घोषणा 3 करोड़ से ज़्यादा करदाताओं के लिए राहत की बड़ी खबर लेकर आई है। वित्तमंत्री पियूष गोयल ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान हमारे द्वारा किये गये प्रमुख कर सुधारों के कारण, कर संग्रहण और कर आधार में महत्‍वपूर्ण वृद्धि देखने को मिली है अत: यह उचित होगा कि कर सुधारों से हुए कुछ फायदों को मध्‍यम वर्ग के करदाताओं तक पहुंचा दिया जाए ।इस बजट में समाज के दूसरे वर्गों को खुश करने के लिए मोदी सरकार ने  कई बड़े ऐलान भी किये।

चुनावी बजट में खुला उपहारों का पिटारा
1. किसान:  सम्मान निधि योजना के तहत 2 हेक्टेयर तक भूमि वाले छोटी जोत वाले किसान परिवारों को 6,000 रुपये प्रति वर्ष मिलेंगे
2.  सेना के जवान: सभी सेनाकर्मियों की सैन्‍य सेवा वेतनमान (एमएसपी) में महत्‍वपूर्ण रूप से बढ़ोत्‍तरी और अत्‍यधिक जोखिम से भरे क्षेत्रों में तैनात नौसेना और वायुसेना कर्मियों को विशेष भत्‍ते दिये जाएंगे।
3. नौकरी पेशा वर्ग : 60 साल से अधिक उम्र वाले मजदूरों को 3000 रूपए पेंशन का भी ऐलान किया। ग्रेच्युटी के भुगतान की सीमा को रुपये 10 लाख से बढ़ाकर रुपये 20 लाख किया गया है।ईएसआईसी की सुरक्षा पात्रता सीमा भी रुपये 15,000 प्रतिमाह से बढ़ाकर रुपये 21,000 प्रतिमाह कर दी गई है। सभी श्रमिकों के न्यूनतम पेंशन प्रतिमाह 1,000 रुपये तय की गई है। सर्विस के दौरान किसी श्रमिक की मृत्यु होने की स्थिति में ईपीएफओ द्वारा राशि 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 6 लाख रुपये तक सुनिश्चित की गई है।

मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक: नंबर 2
आपको बता दें कि मिडिल क्लास को खुश करने से पहले मोदी सरकार ने राम मंदिर के निर्माण पर हो रही देरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कोर्ट से 67 एकड़ अविवादित ज़मीन को रामजन्मभूमि न्यास को लौटाने की मांग की।  प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार कहा है कि जो सर्वोच्च न्यायालय फैसला देगा वह वही मानेंगे लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई लगातार टलने के कारण मोदी सरकार को यह कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा ।

क्या है केंद्र सरकार की मांग?

  • सुप्रीम कोर्ट अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहण की गई 67 एकड़ जमीन को उसके मूल मालिकों ( रामजन्मभूमि न्यास) को लौटाने का आदेश दे।
  • बाकी का 2.77 एकड़ भूमि का कुछ हिस्सा भारत सरकार को लौटा दिया जाए।
  • राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद के आसपास की करीब 70 एकड़ जमीन केंद्र के पास है।
  • 70 एकड़ में से 2.77 एकड़ की जमीन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था।
  • जिस भूमि को लेकर विवाद चल रहा है वो 0.313 एकड़ ही है।
  • विवादित जमीन को छोड़कर बाकी सारी जमीन भारत सरकार को सौंपी जाए क्योंकि इस जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है।

क्या था इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला?
30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अयोध्या विवाद को लेकर फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ की विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांट दिया था। जिस जमीन पर राम लला विराजमान हैं उसे हिंदू महासभा, दूसरे हिस्से को निर्मोही अखाड़े और तीसरे हिस्से को सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया गया था। इस मामले में जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने तब अपना फैसला सुनाया था और जमीन का बंटवारा किया था।

सुप्रीम कोर्ट के लिए प्राथमिकता नहीं है राम मंदिर
जो बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं वही आज भारत की जनता भी महसूस कर रही है कि सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर वकील वकालत कम राजनीति ज़्यादा कर रहे हैं। अयोध्या विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और लगातार इस पर सुनवाई टलने से जनमानस में आक्रोश की भावना भी बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या विवाद पर सुनवाई होनी थी लेकिन जस्टिस बोबडे के छुट्टी पर जाने की वजह से सुनवाई को टालना पड़ा ।

राम लल्ला को मिल रही है तारीख पर तारिख

  • इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को आये 9 साल होने को हैं।
  • 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी ।
  • मामला दो जजों और तीन जजों की बेंच से होता हुआ अब पांच जजों की बेंच के सामने पहुंचा है।
  • 8 जनवरी को 5 जजों की  बेंच का गठन हुआ ।
  • जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस एस.ए. बोब्डे, जस्टिस एन.वी. रमन्ना, जस्टिस यू.यू. ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने 10 जनवरी से इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू करनी थी।
  • 10 जनवरी को सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने बेंच के एक जज यू यू ललित की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए जिसके कारण जस्टिस ललित ने अपने आपको इस केस से अलग कर दिया है। सुनवाई की तारीख 29 जनवरी तय की गई। 29 जनवरी को बेंच के एक जज जस्टिस बोबडे के छुट्टी पर जाने की वजह से  सुनवाई फिर  टाल दी गई है।

मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक: नंबर 3
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री  ने अपने परंपरागत वोटर्स को ध्यान में रखते हुए तीसरा मास्टर स्ट्रोक आर्थिक आधार पर आरक्षण दे कर मारा। बीजेपी सरकार ने आर्थिक रूप से कमज़ोर जनरल केटेगरी  यानी अगड़ी जाति के लोगों को  को 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है। 2014 के चुनाव में 54 प्रतिशत अगड़ी जातियों ने बीजेपी को वोटदिया था। देश की कुल 125  लोकसभा सीट में अगड़ी जातियों की पकड़ है। इसके मद्देनज़र सरकार ने यह फैसला लिया है।

आरक्षण के लिए किया संविधान में संशोधन
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 में 15 (6) और अनुच्छेद 16 में 16 (6 ) जोड़ा गया है।
अनुच्छेद 15 में कहा गया है कि किसी के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान, या इनमें से किसी के ही आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 16 में रोज़गार में समानता का अधिकार देता है। हालांकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला और बच्चों के लिए और सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए राज्य विशेष प्रावधान बना सकता है। अब इन दोनों अनुच्छेद में सामाजिक और  शैक्षिक  के साथ आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को भी शामिल किया गया है।
भारतीय संविधान में 15 प्रतिशत अनुसूचित जाति को 7. 5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति को और27 प्रतिशत ओबीसी को शिक्षा और नौकरी में आरक्षण दिया गया है।

किसे मिलेगा आरक्षण ?

व्यक्ति के परिवार की सालाना आमदनी 8 लाख रूपये से कम हो। परिवार में वह व्यक्ति शामिल है जो आरक्षण का लाभ चाहता है, उसके माता-पिता, भाई-बहन जो 18 वर्ष से कम आयु के हैं, उसका जीवनसाथी  और 18 वर्ष से कम आयु के उसके बच्चे। आमदनी का स्रोत्र  वेतन, खेतीबाड़ी और व्यवसाय कुछ भी हो सकता है। आमदनी को तहसीलदार और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी से प्रमाणित कराना ज़रूरी है।

किसे नहीं मिलेगा आरक्षण

  • जिनके पास 5 एकड़ या उससे ऊपर खेती की ज़मीन है।
  • जिनके पास कम से कम 1000  स्क्वायर फ़ीट का फ्लैट है।
  • जिनके पास निगम के अंदर कम से कम 100 गज का रेजिडेंशियल प्लाट है ।
  • जिनके पास निगम से बाहर कम से कम 200 गज का रेजिडेंशियल प्लाट है

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