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पाकिस्तानी में हामिद को मिली दूसरी मां, दर्द सुनकर वकील ने फ्री में लड़ा था केस

फेसबुक पर प्यार और फिर उसका जो अंजाम हुआ उसके बाद जो हुआ वो हामिद ने कभी सोचा ही नही होगा।

नई दिल्लीः फेसबुक पर प्यार और फिर उसका जो अंजाम हुआ उसके बाद जो हुआ वो हामिद ने कभी सोचा ही नही होगा। बता दें कि पश्तून लड़की के प्रेम में पड़ पाकिस्तानी जेल में 6 साल बिताने वाले हामिद नेहाल अंसारी की वतन वापसी हो गई है। पाक में सजा काटने के बाद हामिद को मंगलवार को रिहा कर दिया गया। हामिद की वापसी तार-तार हो चुके भारत और पाकिस्तान के रिश्ते में कहीं बची एक छोटी सी आस जैसी है। वह आस जिसके लिए दोनों मुल्कों के अमन पसंद लोग रात दिन एक किए हुए हैं। हामिद की वापसी दोनों देशों की जेलों में अंतहीन सजा काट रहे ऐसे लोगों के लिए भी एक भरोसा है कि एक दिन उन्हें भी हामिद की तरह अपने वतन की मिट्टी को चूमने का मौका मिलेगा।

हामिद के पाकिस्तान में मिली दूसरी मांः इस मोड़ पर हामिद केस के दूसरे दो अहम किरदारों की एंट्री होती है। एक रख्शंदा नाज और दूसरे काजी मोहम्मद अनवर। दोनों ही पाकिस्तान के ह्यूमन राइट वकील हैं। हामिद का मामला जब इनके सामने पहुंचा को वह काफी बिगड़ चुका था। दरअसल 12 दिसंबर 2015 को पाकिस्तान की एक मिलिटरी अदालत ने हामिद को जासूसी और पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों का दोषी ठहरा दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रख्शंदा नाज और काजी मोहम्मद अनवर को पहली नजर में ही यकीन हो गया कि हामिद निर्दोष है। इसके बाद दोनों ने हामिद के परिवार से बिना एक पैसा लिए इस केस को अपने स्तर पर लड़ा। एक तरफ काजी मोहम्मद अनवर लगाकार इस केस में भिड़े रहे और कोर्ट को समझाते रहे कि हामिद जासूस नहीं है।

वहीं रख्शंदा नाज ने कोर्ट के इतर एक मां की तरह हामिद का ख्याल रखा। वह अक्सर जेल में हामिद से मिलने जातीं तो उनके लिए खाने का सामान ले जातीं। पाकिस्तान में इन दोनों के अलावा सिविल राइट ऐक्टिविस्टों और अन्य जर्नलिस्टों ने भी काफी मदद की। इनमें एक नाम जर्नलिस्ट जीनत शहजादी का भी रहा। हामिद की मां फौजिया ने अपने बेटे की रिहाई के लिए जीनत से संपर्क साधा था। बाद में जीनत पेशावर जेल में बंद हामिद के केस पर काम करने के दौरान खुद गायब हो गईं थीं। दो साल बाद जीनत को ढूंढने में कामयाबी मिली थी। बाद में बताया कि जीनत को अगवा कर लिया गया था।

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