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चुनाव बजट 2019: किसानों और मीडियम क्लास की हो जाएगी? बल्ले-बल्ले!

कल पेश होने वाले केंद्रीय बजट का मुंह अबकी बार किसानों व बेरोजगारों की तरफ होगा।

कल पेश होने वाले केंद्रीय बजट का मुंह अबकी बार किसानों व बेरोजगारों की तरफ होगा। केंद्र सरकार अपने आखिरी बजट में सबसे ज्यादा इन्हीं को खुश करने की कोशिश करेगी। इसके लिए सरकार ने सारी तैयारियां भी कर ली हैं। इस चुनावी बजट में किसानों के लिए एक बड़े राहत पैकेज का ऐलान हो सकता है। इस पैकेज के तहत किसानों के खाते में सीधा पैसा पहुंचा जाएगा। केंद्र सरकार अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनाव से पहले यह पैकेज लागू करेगी। बताया जा रहा है इस पैकेज के लिए बड़े बजट का प्रावधान किया गया है।

इस अंतरिम बजट में सरकार मध्यम वर्ग को भी लुभाने के लिए उन पर तोहफों की बारिश कर सकती है। मोदी सरकार के 5 साल के कार्यकाल में यह पहला मौका होगा जब केंद्रीय मंत्री अरुण जेतली बजट पेश नहीं करेंगे। वह बीमारी के कारण अमरीका में इलाज करा रहे हैं और उनकी जगह वित्त मंत्रलय का कार्यभार संभाल रहे पीयूष गोयल 1 फरवरी को बजट पेश करेंगे। किसानों के बाद मध्यम वर्ग सबसे बड़ा वर्ग है। इसलिए, माना जा रहा है कि चुनाव से पहले इन दोनों वर्गों को लुभाने में सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी। जेटली ने पहले ही कह दिया है कि इस बार का अंतरिम बजट ‘लेखानुदान मांगों से कुछ अधिक’ होगा। उनके इस बयान से यह कयास लगाया जा रहा है कि सरकार जून-जुलाई तक के लिए लेखानुदान मांगें पेश करने के साथ ही कुछ घोषणाएं भी कर सकती है।

सरकार खर्च करेगी 9.8 अरब डॉलरः

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार किसानों को खुश करने के लिए 70,000 करोड़ रुपए (9.8 अरब डॉलर) की राशि खर्च करने का ऐलान कर सकती है। हालांकि किसानों को इस सुविधा के बाद अन्य तरह की सबसिडी को वापस लिया जा सकता है। सरकार सभी तरह के किसानों, बेरोजगारों और गरीब लोगों को एकमुश्त 30,000 रुपए की मदद देने का ऐलान कर सकती है। यह रकम सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इस मदद को यूनिवर्सल बेसिक इन्कम स्कीम (यू.बी.आई.) के तहत दिया जाएगा।

कुल खर्च 93, 600 करोड़ रुपएः 

10वीं कृषि गणना 2015-16 के अनुसार, छोटे एवं सीमांत किसान जिनके पास 2 हैक्टेयर से कम भूमि है, का भारत में समस्त किसानों में 86.2 प्रतिशत योगदान है और इनके पास 47.3 प्रतिशत फसल क्षेत्र है। 2014-15 तक, सकल बुवाई क्षेत्र 198.36 मिलियन हैक्टेयर अथवा लगभग 496 मिलियन एकड़ था। इस तरह, छोटे एवं सीमांत किसानों के पास 234 मिलियन एकड़ की जमीन थी और 4000 रुपए प्रति एकड़ के नकदी सहयोग पर विचार करें तो कुल खर्च 93,600 करोड़ रुपए रह सकता है।

खत्म हो जाएगी सबसिडीः

हालांकि इस स्कीम के लागू होने के बाद लोगों को राशन और एल.पी.जी. सिलैंडर पर मिलने वाली सबसिडी का फायदा नहीं मिलेगा। इसमें वे किसान भी शामिल होंगे, जो दूसरों के यहां मजदूरी करते हैं। नए प्रस्ताव के मुताबिक किसानों को खेती के लिए अब सरकार सीधे खाते में पैसे देगी। खास बात यह है कि जिन किसानों के पास अपनी जमीन नहीं है, सरकार उन्हें भी इस स्कीम में शामिल करके फायदा पहुंचाएगी।

यह हो सकती है राशिः

केंद्र सरकार प्रति एकड़ 4,000 रुपए से लेकर 12,000 रुपए  की राशि की मदद दे सकती है। हालांकि कई लोगों का मानना है कि यह राशि 30,000 रुपए सालाना भी हो सकती है। छोटे व सीमांत किसानों की आय में कमी की समस्या के समाधान के उपायों को लेकर कृषि मंत्रलय का एक प्रस्ताव बैठक के एजैंडे में है। सूत्रों ने कहा कि कृषि मंत्रलय ने क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए अल्पावधि और दीर्घकालिक दोनों समाधान प्रदान करने के लिए कई विकल्पों की सिफारिश की है।

बीमा पालिसी का प्रीमीयर हो सकता है माफः

खाद्य फसलों के लिए बीमा पॉलिसी लेने वालों किसानों के लिए पूरी तरह से प्रीमियम माफ करने का भी प्रस्ताव है। सरकार तेलंगाना और उड़ीसा सरकारों द्वारा अपनाई गई योजनाओं का मूल्यांकन कर रही है, जिसके तहत एक निर्धारित रकम सीधे किसानों के खातों में डाली जाती है।

समय पर ऋण चुकाने पर फायदाः

सूत्रों के अनुसार इस संबंध में अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में होना है क्योंकि इसमें भारी-भरकम राशि शामिल है। मंत्रलय द्वारा प्रस्तावित विकल्पों में समय पर फसल ऋण चुकाने वाले किसानों का ब्याज माफ करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त 15,000 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा।

आयकर सीमा बढ़ेगीः

सरकार ने पिछले 4 वर्ष  के दौरान व्यक्तिगत आयकर में कोई बड़ी राहत नहीं दी है। जो राहत मिली है  वह भी मानक छूट के रूप में दी गई है। माना जा रहा है कि इस बजट में आयकर की सीमा में बड़ी बढ़ौतरी की जा सकती है। मीडिया में आई कुछ रिपोर्टो में  इसके 5 लाख रुपए किए जाने के भी कयास लगाए गए हैं।

उद्योगों के लिए? :

उद्योगों को प्रत्यक्ष कर में बड़ी राहत की उम्मीद कम है। आयकर में छूट और वस्तु एवं सेवाकर में हाल के दिनों में कई वस्तुओं को निचले स्लैबों में रखने से  सरकार की आमदनी प्रभावित हो सकती है। चालू खाता  घाटे में सरकार पहले ही लक्ष्य से चूक चुकी है। ऐसे में उद्योग जगत के लिए आयकर में छूट की उम्मीद कम है।

रेल किराया नहीं बढ़ेगाः 

रेल बजट को लेकर माना जा रहा है कि चुनावी साल में सरकार किराया बढ़ाने का जोखिम नहीं उठाएगी। बुनियादी ढांचों और क्षमता वर्धन पर उसका जोर रहेगा। रेलवे ट्रैकों के दोहरीकरण, तिहरीकरण और विद्युतिकरण पर सरकार खर्च बढ़ा सकती है। इसके लिए राजस्व जुटाने के लिए आम लोगों पर बोझ डाले बिना गैर-किराया राजस्व संसाधनों के बारे में घोषणाएं हो सकती हैं। रेल मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि मेक इन इंडिया के तहत लोको-लैस ‘ट्रेन-18’ का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। इसके लिए बजट में प्रावधान होगा। सामान्य श्रेणी के यात्रियों के लिए भी घोषणा की जा सकती है।

‘अंतरिम’ ही होगा बजटः

सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि 01 फरवरी को संसद में पेश किया जाने वाला बजट ‘अंतरिम’ ही कहा जाएगा। ऐसी रिपोर्ट आई थी कि मोदी सरकार परंपराओं को तोड़ते हुए चुनाव से पहले आम बजट पेश करेगी। वित्त मंत्रलय ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, ‘यह बजट अंतरिम बजट 2019-20 ही कहा जाएगा और इसलिए किसी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं है।’ उल्लेखनीय है कि आम बजट में पूरे वित्त वर्ष का लेखा-जोखा पेश किया जाता है और सरकार कई नीतिगत घोषणाएं भी करती है। वहीं अंतरिम बजट में कुछ माह के सरकारी खर्चो और राजस्व के लिए लेखानुदान मांगें पेश की जाती हैं। आमतौर पर लोकसभा चुनाव से पहले अंतरिम बजट ही पेश करने की परंपरा रही है और आने वाली सरकार फिर पूर्ण बजट पेश करती है।

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