नई दिल्ली

अपराधियों को टिकट न दिये जाने संबंधी याचिका खारिज, राजनीति का खुला रास्ता

 उच्चतम न्यायालय ने गंभीर अपराध के आरोपियों को चुनाव में टिकट न दिये जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सोमवार को इन्कार कर दिया।

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने गंभीर अपराध के आरोपियों को चुनाव में टिकट न दिये जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सोमवार को इन्कार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली प्रदेश इकाई के नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि याचिकाकर्ता इस मामले में चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटायें।

न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा, ‘‘आप अपनी ये मांग निर्वाचन आयोग के समक्ष रखें।’’ याचिका में मांग की गयी थी कि राजनीतिक दलों को ऐसे लोगों को टिकट देने से रोका जाये, जिनके ऊपर चुनाव से साल भर पहले से गंभीर अपराध में आरोप तय हैं। इस याचिका में कहा गया था कि गंभीर अपराध का मतलब पांच वर्ष या इससे ज्यादा की सजा के अपराध में अदालत से आरोप तय होना है।

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि उन राजनीतिक दलों की मान्यता राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टी के तौर खत्म कर दी जाये जो दागियों को टिकट देते हैं। उपाध्याय ने राजनीति के बढ़ते अपराधीकरण का हवाला देते हुए लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में दागियों के आंकड़े भी उपलब्ध कराये थे।

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