नई दिल्ली

अलविदा 2018ः सुप्रीम कोर्ट के वो अहम फैसले जिन्होंने बदली देश की पुरानी तस्वीर

बस कुछ ही दिनाें में हम 2018 काे अलविदा कहने वाले हैं और नया साल का स्वागत करने वाले हैं।

नई दिल्लीः बस कुछ ही दिनाें में हम 2018 काे अलविदा कहने वाले हैं और नया साल का स्वागत करने वाले हैं। 2018 में बहुत कुछ हुआ, कई हादसे हुए, ताे कई अह्म फैसले लिए गए। आज हम आपकाे उन अहम फैसलाें के बारे में बताने जा रहे हैं, जाे सुप्रीम काेर्ट ने 2018 में लिए हैं।

निर्भया कांड पर लिया अहम फैसला-

निर्भया कांड के बारे में कौन नहीं जानता हैं। 16 दिसंबर, 2012 काे एक चलती बस में 23 साल की निर्भया के साथ 6 दरिंदाें ने सारी हादें पार कर दी थी। इन 6 आराेपियाें में से एक काे नाबालिक हाेने के कारण कुछ समय के बाद छाेड़ दिया गया था, ताे एक ने जेल के अंदर ही आत्महत्या कर ली थी। बाकि 4 काे सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 9 जुलाई को फैसला सुनाया गया।निर्भया कांड में सुप्रीम कोर्ट चार दोषियों में से तीन की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाते हुए तीनों दोषियों की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा।

समलैंगिकता पर लिए अहम फैसला-

सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 6 सितंबर को समलैंगिकता पर फैसला सुनाते हुए कहा कि ये अपराध नहीं है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने एकमत से ये फैसला सुनाया है। करीब 55 मिनट में सुनाए इस फैसले में धारा 377 को रद्द कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को अतार्किक और मनमानी बताते हुए कहा कि एलजीबीटी समुदाय को भी समान अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह का भेदभाव मौलिक अधिकारों का हनन है। धारा 377 संविधान के समानता के अधिकार आर्टिकल 14 का हनन करती है।

कावेरी जल विवाद पर आया अहम फैसला-

कावेरी जल विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस साल 15 फरवरी को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि नदी के पानी पर किसी भी स्टेट का मालिकाना हक नहीं है। कर्नाटक को आदेश दिया कि वह बिलिगुंडलू डैम से तमिलनाडु के लिए 177.25 टीएमसी (थाउजेंड मिलियन क्यूबिक) फीट पानी छोड़े। हालांकि कोर्ट ने तमिलनाडु को मिलने वाले पानी में 14.75 टीएमसी फीट की कटौती की है। यानी अब उसे पहले से 5% कम मिलेगा। वहीं, कर्नाटक के कोटे में 14.75 टीएमसी का इजाफा किया है।

विवाह के बाद अवैध संबंध पर आया अहम फैसला-

सुप्रीम कोर्ट ने एडल्ट्री संबंधी कानून की धारा 497 को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद अब एडल्ट्री अपराध नहीं है। महिलाओं के साथ असमान व्यवहार करने वाला कोई भी प्रावधान संवैधानिक नहीं है। न्यायमूर्ति मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर, न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन, न्यायमूर्ति डी. वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की पीठ ने कहा कि एडल्ट्री के संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 497 असंवैधानिक है।

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