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By election analysis: उपचुनाव नतीजे कहीं 2019 का ट्रेलर तो नहीं?

कर्नाटक के 3 लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों पर आए चुनावी परिणामों ने तय कर दिया है

कर्नाटक के 3 लोकसभा और 2 विधानसभा सीटों पर आए चुनावी परिणामों ने तय कर दिया है कि उपचुनाव में भाजपा को साढ़े चार साल में हार दर हार का सामना करना पड़ा है, इसलिए राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि कहीं उपचुनाव परिणाम लोकसभा चुनाव का ट्रेलर तो नहीं है। साल 2014 में मोदी सरकार के गठन के बाद से पार्टी को लगातार उपचुनावों में शिकस्त झेलनी पड़ी है।

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से अभी तक 30 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं। भाजपा लगातार अपनी जीती हुई सीटों को एक-एक करके हारती जा रही है।
नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 282 सीटों पर कमल खिलाने वाली भाजपा 1984 के बाद के 30 साल में अपने दम पर बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी बनी थी। 2014 के बाद से 30 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं जिनमें से 16 सीटें भाजपा के कब्जे में थीं लेकिन अब इनमें से महज 6 सीटें ही भाजपा बरकरार रख सकी है यानी पार्टी ने 10 सीटें गंवा दी हैं। यही वजह है कि लोकसभा में उसकी सीटों का आंकड़ा 282 से घटकर 272 रह गया है।

5 राज्यों के चुनावों पर भी नतीजे का असर!
इन उपचुनावों पर सभी की निगाहें इसलिए टिकी थीं क्योंकि इनके नतीजों का असर कांग्रेस और जे.डी.एस. गठबंधन पर भी पड़ेगा। जहां तक भाजपा के लिए इन नतीजों का सवाल है तो कई मायनों में यह भगवा ब्रिगेड के लिए सही नहीं है। इनसे एक बात तो तय हो गई है कि पार्टी गठबंधन से लडऩे की हैसियत नहीं रखती है। यही नहीं, इन नतीजों का असर आगे 5 राज्यों में होने वाले चुनावों पर भी पड़ेगा। मई में हुए चुनावों के दौरान दोनों पाॢटयां एक-दूसरे के खिलाफ  लड़ी थीं लेकिन नतीजे आने के बाद गठबंधन कर लिया था। ऐसे में 2019 चुनाव से पहले गठबंधन की ताकत, आपसी तालमेल और जनता पर असर की परख इन चुनावों में देखने को मिली। गठबंधन के प्रदर्शन से भाजपा के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं।

कांग्रेस का बढ़ेगा मनोबल
ये नतीजे कर्नाटक की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं। खासकर उपचुनाव के नतीजों के बाद 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-जे.डी.एस. मजबूत मनोबल के साथ मैदान में उतरेगी, वहीं भाजपा को एक बार फिर से अपने कार्यकत्र्ताओं में जोश भरना होगा।

दूसरे राज्यों पर भी हो सकता है असर
इन नतीजों से गठबंधन की राजनीति को ताकत मिलने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और अगले साल लोकसभा चुनाव होंगे। कांग्रेस- जे.डी.एस. का पहले से ही मानना है कि इन राज्यों के चुनावों पर कर्नाटक उपचुनाव का असर पड़ेगा। ऐसे में मिली जीत गठबंधन के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

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